🙂उदासी🙂
जज्बातों को हद मे रखकर ,
उदास हो के लिखता हूँ ।
दुसरो के छत से नहीं ,
खुद के आँगन से लिखता हूँ ।
मयखाने तुमनें à¤ी देखे होंगे शहर मे कई ,
साफ़ कितने है ?
मैं किसी की नीयत की बात ,
थोड़ी करता हूँ ।
अकेला नही रहता हर वक़्त मैं ,
उदासियाँ साथ है मेरे à¤ी ।
गिनता नही मैं हर वक़्त उदासियो को ,
की ये कितने है ?
ख़ुशी के पल तो थोड़े ही है ।
चलो जीते है थोड़ा इन्हें हम à¤ी है ।
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